HINDI:

२२ जुलाई  हरि-कमल फाउंडेशन फॉर पॉलिसी रिसर्च ने मेन्स्त्रुअल हाइजीन पर एक ओपन डिस्कशन व अवेयरनेस कैंप का आयोजन किया |  कैंप सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या विद्यालय, भोपाल में आयोजित किया गया था | इस मौके पर फाउंडेशन ने 400 लड़कियों को इस गंभीर समस्या पर जागरूक किया व अन्य जुड़े हुए मुद्दों पर बातचीत की |

इस कैंप का नेतृत्व फाउंडेशन की बोर्ड मेम्बर डॉ. रूपल श्रीवास्तव ने किया | कैंप में लड़कियों को इस प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया पर खुल कर अपने विचार रखने व बात करने की सलाह दी | रूपल ने यह भी बताया की कैसे आज भी महिलाओं की इस शारीरिक प्रक्रिया को समाज समझ नहीं पा रहा और लगातार इसको नज़रंदाज़ कर रहा है, जिससे यह पूरा मुद्दा एक गोपनीय व निषेध का रूप ले लिया है |

रूपल ने यह भी बताया की कैसे सेनेटरी नैपकिन्स का अपढ डिस्पोजल हो रहा है जिससे पर्यावरण और स्वच्छता, दोनों को खतरा है | रूपल जी ने नैपकिन्स को एनवायरनमेंट फ्रेंडली तरीके से डिस्पोज करने के तरीके बताये | रूपल ने झोपड़ पट्टी व ग्रामीण इलाकों में रहने वाले महिलाओं के लिए कम महंगे, सस्ते एवं फिर से इस्तेमाल कर सकने वाले सेनेटरी पैड्स के बारे में भी बताया | रूपल ने सरकार की इस मुद्दे से जुडी विभिन्न योजनों के बारे में भी लड़कियों को जागरूक किया |

इसके अलावा डॉ. रूपल श्रीवास्तव ने पीरियड्स के बारे में बायोलॉजिकल जानकारी प्रदान करी | उन्होंने इसको एक साधारण प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया बताया, जिसने अब एक गंभीर निषेध का रूप ले लिया है |

कैंप के दौरान बच्चों ने स्कूल व अन्य पब्लिक स्थानों पर महिलाओं को पीरियड्स के दौरान क्या क्या मुश्किलें सहनी पड़ती हैं इस पर भी खुल कर बात की | बच्चों ने इसको जेंडर बेस्ड प्रॉब्लम भी बताई |

फाउंडेशन के उपाध्यक्ष रोबिन कोशी बताते हैं की इस कैंप का मकसद सिर्फ इस मुद्दे पर खुल के चर्चा करना है, लड़कियों की हिचकिचाहट और तकलीफ कम करना है | “हम आगे चल कर आगंवादी व ग्रामीण इलाकों में भी इस तरह के कैंप का आयोजन करेंगे” रोबिन ने बताया |

यही नहीं, फाउंडेशन के अध्यक्ष ऋषभ श्रीवास्तव बताते हैं कि, हरि-कमल फाउंडेशन फॉर पॉलिसी रिसर्च सोशल मीडिया पर भी मेन्स्त्रुअल हाइजीन पर पिछले एक महीने से कैंपेन चला रहा है | सोशल मीडिया के ज़रिये कम से कम फाउंडेशन १०,००० लोगों तक अपनी बात रखने में कामियाब हुआ है | मेन्स्त्रुअल हाइजीन पर डिजिटल पोस्टर्स, फैक्ट्स, सरकारी योजनायें, महिलाओं के अपने व्यकितगत एक्सपीरियंस आदि सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे हैं | ऋषभ यह भी बताते हैं की काफी महिलाएं और लड़कियां उनके इस सोशल मीडिया कैंपेन को सहयोग दे रही हैं और इसका हिस्सा भी बन रही हैं |

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ENGLISH:

Hari-Kamal Foundation for Policy Research (HKFPR) organized the camp to sensitize the youth of the city on the issue of menstrual hygiene, which is still considered as a social taboo in our society. This camp was the part of an initiative by HKFPR to help women in fighting against all the myths which have been falsely imposed upon them from a long time with regard to menstrual periods.

The camp was organized at Sarojini Naidu Government Girls School, Bhopal. The foundation addressed around 400 girls on this issue. The Camp was led by foundation’s board member, Dr. Rupal Shrivastava.

Rupal explained about the various problems that women are facing today. Lack of low cost or affordable sanitary pads, low awareness on sanitation, attachment of false myths, social unacceptability and patriarchal thinking are few of the problems which the women are facing today.

She also highlighted that how the unscientific disposal of sanitary pads is creating a big problem for the environment. Rupal explained the scientific method of disposal for the sanitary napkins.

Girls were asked to come forward and talk on this issue without any hesitation. “We have to be proud of our bodies and whatever process the god has naturally provided us with” said Rupal. She insisted that schools and other public places should have adequate private spaces where girls during their periods can feel comfortable and can maintain their bodily hygiene.

Dr. Rupal Shrivastava, member of the foundation as well as a Biotechnologist explained that the entire menstrual cycle is a natural process and there is nothing which the girls should feel ashamed off. Rupal insisted on safe and scientific disposal of these pads so that from health point of view no contamination of the surroundings or woman’s body take place.

The Vice-President of the foundation, Robin Koshy stated the true purpose behind organizing this camp. “We wanted youth of this city to come and talk on this subject which is still considered as something bad and unwarranted. If we have to improve the situation, we have to gather support from the people of the city” said Robin.

Not only this, the foundation has also been running a social media campaign on menstrual hygiene management, reveals Rishabh Shrivastava, president of the foundation. “Till now we are able to keep our views in front of at least 10,000 people. We have been constantly monitoring our campaign and day-by-day our reach is increasing” tells Rishabh. Digital posters, facts and data, government policies, personal experiences of women related to menstrual hygiene are being constantly shared by foundation via social media. The sole objective of the campaign has been to make people aware on the issues and consider it as a non-taboo topic. Women are taking part in the campaign launched by the campaign.

To be the part of our campaign on menstrual hygiene management, please contact us:

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